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    जन्मों की गुलामी - ओशो

    जन्मों की गुलामी - ओशो


    जन्मों की गुलामी - ओशो

            एक बहुत पुरानी यूनानी कथा है। एक सम्राट को ज्योतिपियों ने कहा कि इस वर्ष पै दा होने वाले बच्चों में से कोई एक तेरे जीवन का घाती होगा। ऐसी बहूत कहानियां हैं संसार के सभी देशों में। कृष्ण के साथ भी ऐसी कहानी जोड़ । है और जीसस के साथ भी है कहानी जोड़ी है। लेकिन यूनानी कहानी का कोई मु कावला नहीं।

            सम्राट ने जितने वच्चे उस वर्ष पैदा हुए, सभी को कारागृह मग डाल दिया, मारा न __ हीं। क्योंकि सम्राट को लगा कि कोई एक इनमें से हत्या करेगा और सभी हत्या में करूं, यह महा-पातक हो जाएगा। छोटे-छोटे बच्चे बड़ी मजबूत जंजीरों में जीवन भर के लिए कोठनियों में डाल दिए गए| जंजीरों में जीवन भर के लिए कोठरियों में डा ल दिए गए। जंजीरों में बंधे-बंधे हुए ही वे बड़े हुए। उन्हें याद भी न रही कि कभी ऐसा भी कोई क्षण था जब जंजीरें उनके हाथ में न रही हों। जंजीरों को उन्होंने जीवन के अंग की तरह ही पाया और जाना। उन्हें याद भी तो नहीं हो सकती थी, कि कभी वे मुक्त थे। गुलामी ही जीवन थी, और इसीलिए उन्हें कभी गुलामी अखरी नहीं। क्योंकि तुलना हो तो तकलीफ होती है। तुलना का कोई उपाय ही न था। गुलाम ही वे पैदा हुए थे, गुलाम ही वे बड़े हुए थे। गुलामी ही उ नका सार-सर्वस्थ थी। तुलना न थी स्वतंत्रता की। और दीवारों से बंध थे वे, भयंकर मजबूत जंजीरों से। और उनकी आंखें अंधकार की इतनी आधीन हो गई थी कि वे पीछे लौटकर भी न हीं देख सकते थे, जहां प्रकाश का जगत था। प्रकाश कष्ट देने लगा था। अंधेरे से इतनी राजी हो गए थे, कि अव प्रकाश से राजी नहीं हो पाती थी आंखें। सिर्फ अंधेरे में ही आंख खुलती थीं, प्रकाश में तो बंद हो जाती थीं।

    ओशो 

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